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करोड़ों की सड़क या भ्रष्टाचार का खेल ? सोनहत-रामगढ़ से कछाड़ी सड़क निर्माण में अब इंजीनियर-ठेकेदार गठजोड़ के आरोप, बनते ही झड़ रही रिटर्निंग वॉल

करोड़ों की सड़क या भ्रष्टाचार का खेल ?

सोनहत-रामगढ़ से कछाड़ी सड़क निर्माण में अब इंजीनियर-ठेकेदार गठजोड़ के आरोप, बनते ही झड़ रही रिटर्निंग वॉल

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कोरिया। जिले के सोनहत-रामगढ़ मार्ग (T-01) से कछाड़ी तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही लगभग 16 किलोमीटर लंबी सड़क अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही के साथ-साथ ठेकेदार और संबंधित विभाग के इंजीनियरों की मिलीभगत से नियमों को खुलेआम दरकिनार किया जा रहा है।

निर्माण स्थल पर हालात ऐसे हैं कि रिटर्निंग वॉल बनते ही जगह-जगह से झड़ने लगी है। कई हिस्सों में सीमेंट और गिट्टी हाथ लगाने पर टूट रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण सामग्री का अनुपात पूरी तरह संदिग्ध है और गुणवत्ता नियंत्रण नाम की कोई चीज नजर नहीं आ रही। सबसे बड़ी चिंता यह है कि बरसात शुरू होने से पहले ही दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिससे भविष्य में बड़े हादसे की आशंका बढ़ गई है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में क्योरिंग तक सही तरीके से नहीं कराई जा रही। वहीं रिटर्निंग वॉल की नींव भी कमजोर बताई जा रही है। कई लोगों का दावा है कि स्टीमेट के अनुसार सरिया का उपयोग नहीं किया गया, जबकि भुगतान करोड़ों रुपये का किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर तकनीकी स्वीकृति देने वाले जिम्मेदार इंजीनियर मौके पर क्या देख रहे हैं?

स्थानीय सूत्रों की मानें तो पूरे मामले में ठेकेदार और विभागीय इंजीनियरों के बीच सांठगांठ की चर्चा जोरों पर है। आरोप है कि निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता को नजरअंदाज कर कागजों में सब कुछ “मानक अनुरूप” दिखाया जा रहा है। यही वजह है कि शिकायतों के बावजूद न तो गंभीर जांच हो रही है और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई दिखाई दे रही है।

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ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। फोन कॉल्स तक रिसीव नहीं किए जा रहे। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब लोग खुलकर सवाल पूछ रहे हैं कि क्या करोड़ों रुपये की इस परियोजना में जनता की सुरक्षा से ज्यादा कमीशन और भ्रष्टाचार को महत्व दिया जा रहा है?

क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि जिम्मेदार अधिकारी गांधी जी के “तीन बंदरों” की भूमिका निभा रहे हैं — गड़बड़ी देखना नहीं चाहते, शिकायत सुनना नहीं चाहते और कार्रवाई करना नहीं चाहते। इसी कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री की लैब टेस्टिंग हो और यदि गड़बड़ी साबित होती है तो संबंधित ठेकेदार, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि अभी कार्रवाई नहीं हुई तो यह सड़क आने वाले समय में विकास नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल बन जाएगी।

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